उत्तराखण्ड

काशीपुर में STF का बड़ा एक्शन, कार से मिले अवैध हथियारों का जखीरा

उत्तराखंड में फर्जी शस्त्र लाइसेंस और अवैध हथियारों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और ऊधमसिंह नगर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। संयुक्त कार्रवाई में काशीपुर से भारी मात्रा में अवैध हथियार, कारतूस और फर्जी शस्त्र लाइसेंस बरामद किए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद प्रदेश में अवैध हथियारों के नेटवर्क और फर्जी लाइसेंस रैकेट को लेकर सुरक्षा एजेंसियां और अधिक सतर्क हो गई हैं। जानकारी के अनुसार STF को गुप्त सूचना मिली थी कि काशीपुर के कटोराताल क्षेत्र में खड़ी एक स्विफ्ट कार में अवैध हथियार और कारतूस रखे गए हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए STF और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर वाहन को अपने कब्जे में लिया और उसकी तलाशी शुरू की। जांच के दौरान जो सामान बरामद हुआ उसने अधिकारियों को भी चौंका दिया।

तलाशी के दौरान कार से एक 12 बोर पम्प एक्शन गन, एक 22 बोर सेमी ऑटोमैटिक राइफल, एक 32 बोर सेमी ऑटोमैटिक पिस्टल और एक 32 बोर रिवॉल्वर बरामद की गई। इसके अलावा वाहन से कुल 237 जिंदा कारतूस, चार मैगजीन और सात फर्जी शस्त्र लाइसेंस भी बरामद किए गए। पुलिस ने बरामद हथियारों और दस्तावेजों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बरामद हथियार, कारतूस और फर्जी लाइसेंस काशीपुर निवासी सौरभ अग्रवाल, गौरव अग्रवाल और दीप्ति अग्रवाल से जुड़े हुए हैं। पुलिस ने तीनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और मामले के अन्य पहलुओं की भी गहन जांच की जा रही है।

एसएसपी STF ने बताया कि उत्तराखंड में बाहरी राज्यों से ट्रांसफर होकर आए शस्त्र लाइसेंसों की व्यापक जांच की जा रही है। जांच के दौरान कई संदिग्ध मामलों का खुलासा हुआ है, जिनमें फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाइसेंस हासिल करने और हथियार रखने की जानकारी सामने आई है। इसी अभियान के तहत अब तक तीन मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अवैध हथियारों और फर्जी लाइसेंसों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। प्रदेश में कानून व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने और अपराध पर अंकुश लगाने के लिए STF लगातार निगरानी कर रही है। इस कार्रवाई को राज्य में अवैध हथियारों के खिलाफ अब तक की महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस मामले की गहन जांच से फर्जी शस्त्र लाइसेंस नेटवर्क और अवैध हथियारों की सप्लाई से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है ताकि भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

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